08
मार्च
10

रविवार की छुट्टी

रविवार। सप्ताह का वह दिन जिसका सबको इंतजार रहता है। ऎसा कौन होगा जो इस दिन को पसन्द नहीं करता होगा। हर व्यक्ति सोमवार से ही रविवार के लिये योजना बनाना प्रारंभ कर देता है कि वह इस दिन क्या करेगा। यह बात अलग है कि वह इस दिन करता कुछ नहीं है। सारी योजनाऎं बदल जाती है। पूरे सप्ताह कार्य करने के बाद एक यही दिन मिलता है जब हम अपने या अपने परिवार के लिये कुछ कर सकते हैं। अगर हमारी इच्छा सिर्फ़ आराम करने की ना हो तो। क्योंकि आराम से बड़ा और क्या काम हो सकता है, किसी ने कहा है कि-

“किसको-किसको देखिये, किसको-किसको रोईये।
आराम बड़ी चीज़ है, मुँह ढ़ांक के सोईये॥”

आप तो जानते ही होगें कि अंग्रेजों ने छुट्टी के लिये रविवार का ही दिन क्यों चुना। दरअसल इस दिन को उन्होनें चर्च जाने के लिये चुना था। इसलिये वो लोग इस दिन छुट्टी मनाते थे। ठीक वैसे ही जैसे खाड़ी देशो में शुक्रवार के दिन नमाज़ के कारण छुट्टी रखी जाती है। अब हम भारतीयों के ३३ करोड़ देवी-देवता है इसलिये हम उनके लिये कोई एक दिन तो तय नहीं कर सकते। तो हमारी सरकार ने अंग्रेजो की नकल करना ही ठीक समझा और हमें भी रविवार की छुट्टी मिल गयी। गलती सरकार की नहीं हमारे भगवानों की है, उन्होनें इतने अवतार नहीं लेना चाहिये। अब हमारी सरकार भी क्या करें।

कहतें हैं ना कि नक़ल के लिये भी अक़ल की जरूरत होती है, वो शायद हमारी सरकार ने लगा ली। तभी तो दो दिनों के सप्ताहांत की जगह हमें सिर्फ़ एक दिन का ही साप्ताहिक अवकाश मिला। काश हमारी सरकार मे इतनी अक़ल ना होती या फिर थोड़ी ज्यादा होती तो और भी कई मसलें थे जिन पर विचार किया जा सकता था। खैर अब किया भी क्या जा सकता है सिवाय इसके हम अपने-अपने कार्यालय में, कार्य के समय, बैठकर रविवार की योजना बनाऎं। आप भी बनाईयें और मैं भी बनाता हूँ।

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12 Responses to “रविवार की छुट्टी”


  1. मार्च 8, 2010 को 11:22 अपराह्न

    आठ घंटों के कार्य दिवस और साप्ताहिक अवकाश के मूल से थोडा ध्यान हटा कर आपने खूब व्यंग्य किया है….

  2. मार्च 9, 2010 को 9:28 अपराह्न

    कली बेंच देगें चमन बेंच देगें,

    धरा बेंच देगें गगन बेंच देगें,

    कलम के पुजारी अगर सो गये तो

    ये धन के पुजारी वतन बेंच देगें।

    हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज “जनोक्ति “आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . नीचे लिंक दिए गये हैं . http://www.janokti.com/ , साथ हीं जनोक्ति द्वारा संचालित एग्रीगेटर ” ब्लॉग समाचार ” से भी अपने ब्लॉग को अवश्य जोड़ें .

    • मार्च 10, 2010 को 10:46 पूर्वाह्न

      वाह क्या बात कही है जयरामजी। मैं पुरी कोशिश करूगां आपकी अपेक्षाओं पर ख़रा उतरने की। अगर कोई त्रुटि हो जाये तो अवश्य अवगत करायें। अभी तो शुरूआत है बहुत कुछ सीखना है, आपके सहयोग की अपेक्षा रहेगी।

  3. 12 Gulam ashraf turki
    मई 22, 2016 को 1:54 अपराह्न

    Sahi baat hai hame thanx jankari ke liye yahi karna chahiye


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