11
अप्रै
10

सही या गलत

जब भी आपने कोई कार्य किया हो या करने की योजना बनाई होगी तो ये शब्द आपने जरूर सुने होगें। जन्म से मृत्यु तक ये दो शब्द हमारे साथ जुड़े रहते है और हमें कई ऎसे कार्य करने से रोक देते हैं, जिन्हें करना शायद ज्यादा उचित रहता। पर क्योंकि वो दुसरों की नज़र में गलत थे इसलिए हमें करने नहीं दिया गया। और कई बार ऎसा भी होता है कि हमें वो करना पड़ता है जो हम करना नहीं चाहते, पर समाज की नज़र में वही सही है।

लेकिन सवाल यह उठता है कि वास्तव में सही या गलत की परिभाषा क्या है? यह जरूरी नहीं कि जो चीज एक व्यक्ति या समूह के लिये सही हो वही सभी के लिये सही हो या जो किसी के लिये गलत हो वो सबके लिये भी गलत ही होगा। देखा जाये तो किसी चीज के सही या गलत होने का निर्धारण समय, परिस्थिति, स्थान और उद्देश्य के आधार पर होना चाहिये ना कि परंपरा या रुढियों के आधार पर। झूठ बोलना गलत है लेकिन कई परिस्थितियों में ये सही भी हो सकता है।

दरअसल प्राचीन समय से कुछ मान्यतायें चली आ रही है, जिनमें कुछ चीजों को सही और कुछ को गलत बतलाया गया है। और हमारे जन्म के साथ ही हमारे परिवार वाले, मित्र, शिक्षक, रिश्तेदार, परिचित आदि हमें ये मान्यतायें सिखाते जाते हैं। स्थिति यह हो जाती है कि किसी भी विषय के लिये हम अपने खुद के विचार व्यक्त ही नहीं कर पाते। क्योंकि हमारे अंदर बैठी मान्यता हमारे सोचने से पहले ही बता देती है कि यह सही है या गलत। उदाहरण के लिये किसी गुलाब के फूल को देखते ही हम सोच लेते हैं कि यह सुदंर है। क्योंकि बचपन हम यही सुनते या पढ़ते आयें है कि गुलाब सुदंर होता है और हमने भी यही धारणा बना ली। पर वास्तव में तो हमने गुलाब की सुदंरता को महसूस ही नहीं किया। हो सकता है वो हमें सुदंर ना भी लगे। कहने का तात्पर्य यही है कि किसी भी विषय पर हमें अपने खुद के विचारों का उपयोग करना चाहिए ना कि उधार मिले विचारों का।

जो चीज कल गलत थी वो आज सही भी हो सकती है और जो कल सही थी वो आज गलत भी हो सकती है। सही या गलत की परिभाषा हर व्यक्ति के लिये अलग-अलग होती है, क्योंकि हर व्यक्ति की परिस्थितियां अलग-अलग होती है। आवश्यकता केवल अपने नजरिये की है, समाज के नजरिये की नहीं। क्योंकि समाज हमें सलाह देने के अलावा और कुछ नहीं दे सकता। और ज्यादातर मामलों में समाज आपको वही करने से रोकता है जो आपके लिये शायद और अच्छा हो सकता है। हम सभी दोहरी मानसिकता में जीते हैं। अगर कोई कार्य हम करें तो वह हमें सही लगता है लेकिन कोई और करें तो हम उसे गलत बताते हैं। ऎसा क्यों? फिल्मों में प्यार-मोहब्बत देखना हमें सही लगता है और अगर हमारे आस-पास या परिवार में कोई प्यार करे तो वह गलत हो जाता है। ये कैसी मानसिकता है? क्या यह सही है? यह तो वही बात हुई कि “आप करो तो लीला, हम करें तो चरित्र ढ़ीला”।

तो अपने अंदर बैठी धारणाओं को दूर हटाईये और अपने खुद के मौलिक विचारों को जन्म दीजिये। और फिर सोचिये कि क्या सही है और क्या गलत। यकीनन आप ज्यादा उचित निर्णय ले पायेगें।

25
मार्च
10

इश्क

आओ इक खेल इश्क का सिखा दें तुमको
तुम अपना दिल दो हम वफा दें तुमको
कोई यहां मरता नहीं किसी के बिना
कैसे जीतें हैं हम ये बता दें तुमको
ढूंढते फिरते हो तुम जिनको ख़्वाबों में
आओ उन्हीं खुशियों का पता दें तुमको
बहुत कर ली कोशिश तुम्हें भुलाने की
तुम ही बताओ कैसे भुला दें तुमको
होती है दुश्मन दुनिया तो होने दो
हम हर हाल में मिलेंगें जता दें तुमको
खेलो जो बाजी प्यार की हमारे साथ में
खुद हार जायें और जिता दें तुमको

15
मार्च
10

प्यार

खुदा का बनाया हुआ सबसे खूबसूरत जज़्बा। दो दिलों के बीच सबसे मजबूत बंधन का नाम है प्यार। बिना प्यार के जिंदगी कोई मायने नहीं रखती। चाहे वो माँ-बेटे का प्यार हो, भाई-बहन का, दोस्तों का, पति-पत्नी का या प्रेमी-प्रेमिका का। बिना प्यार के दुनिया की कल्पना करना भी मुश्किल लगता है। शायद इसीलिये हमारे धर्मग्रंथों में भी प्यार की ही महिमा है और भगवान ने भी अवतार लेकर प्यार के आदर्श प्रस्तुत किये हैं। किसी ने कहा भी है-

चाहे गीता बांचिये या पढ़िये कुरआन
मेरा तेरा प्यार ही हर पुस्तक का ज्ञान

प्यार एक ऎसा अहसास है जिस पर या तो बहुत कुछ लिखा जा सकता है या शायद कुछ भी नहीं। इसमें आप जितना गहरे उतरते हैं उतना ही इसको समझने लगते हैं। यही एक ऎसा अहसास है जिसे हर कोई समझ लेता है, चाहे वह इंसान हो या जानवर। प्यार को व्यक्त करने के लिये आपको किसी भाषा की जरूरत नहीं होती, ये तो आपकी निगाहें ही बयां कर देती है।

प्यार उन्मुक्त होता है, ये किसी बंधन या शर्त को स्वीकार नहीं करता। प्यार में बंधन की कोई जगह नहीं होती। यदि आप किसी से प्यार करते हैं तो वो जो है, जैसा है उससे प्यार करते हैं। अगर आप उसे बदल कर प्यार करना चाहते हैं तो फिर ये प्यार हो ही नहीं सकता। प्यार यह नहीं है कि आप चाहतें हैं वो हमेशा आपके साथ रहे, प्यार तो यह है कि वो जहां भी रहे खुश रहे। क्योंकि प्यार सिर्फ देना जानता है, लेना नहीं।

सबसे ज्यादा जिस प्यार की चर्चा होती है वह है, प्रेमी-प्रेमिका का प्यार। और हो भी क्यों ना इतना खूबसूरत अहसास और कहां मिलेगा। एक-दूसरे को देखकर चेहरे पर रौनक आ जाना, दिल की धड़कन बढ़ जाना, मिलने के लिए तड़पना, रुठना-मनाना।

नज़र मुझसे मिलाती हो तो तुम शरमा सी जाती हो
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।

कहतें हैं कोई सब कुछ भूल सकता है पर अपना पहला प्यार नहीं भुला सकता।

भूले से भी नहीं भुलेंगें वो बीते ज़माने
वो रेशमी लम्हें वो मोहब्बत के फसानें

प्यार में ही इतनी ताकत है कि वो शैतान को भी इंसान बना सकता है। अगर दिलों में प्यार कायम हो जाये तो नफ़रत के लिये कहीं कोई जगह ही नहीं बचेगी। और दुनिया में जितनी समस्यायें हैं सब खत्म हो जायेगी। पता नहीं क्यों लोग आपस में प्यार से क्यों नहीं रह सकते। लड़ते-झगड़्ते क्यों रहतें हैं? आप प्यार किसी एक से करतें हैं और आपको सारी दुनिया प्यारी लगने लग जाती हैं। दुनिया में ऎसी कोई समस्या नहीं है जिसका हल प्यार से नहीं हो सकता हो। प्यार सच्चा या झूठा नहीं होता, प्यार थोड़ा या ज्यादा नहीं होता। प्यार सिर्फ़ प्यार होता है और कुछ नहीं। और इससे पवित्र अहसास दूसरा नहीं हो सकता। इसीलिये तो भगवान भी सिर्फ़ प्यार के ही भूखे होते हैं।

हमनें देखी हैं उन आँखों की महकती खूशबू
हाथ से छूकर इसे रिश्तों का इल्जाम न दो
एक अहसास है ये रूह से महसूस करो
प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम न दो

अगर आप किसी से प्यार करते हैं तो हिचकिये मत। अपने प्यार को उस पर जाहिर कीजिये। याद रखिये आप कोई गुनाह नहीं कर रहें हैं, जो सबसे छुपाये। बस एक गुज़ारिश है, प्यार करें खिलवाड़ नहीं। प्यार को बदनाम करने वाले भी बहुत से लोग है दुनिया में। लेकिन प्यार वो शमा है तो हमेशा से जलती रही है। ये ना कभी बुझी है और ना कभी बुझेगी।

जब आँचल रात का लहराये
और सारा आलम सो जाये
तुम मुझसे मिलने शमा जलाकर
ताज़महल में आ जाना।

15
मार्च
10

अक्स

इक अक्स सा अक्सर जेहन में उभर जाता है
फुल खिलते हैं और गुलशन संवर जाता है
दास्तानें-मोहब्बत क्या कहें बस नाम उनका है
जो दिल से उठता है जुबां पर ठहर जाता है
एक बस उसका चेहरा बस गया है निगाहों में
वरना तो मंजर आता है और गुज़र जाता है
जिसको पाने के लिये मचल उठा था दिल
उसको खो देने के ख़्यालों से सहर जाता है
कितना भी संभालों ख़्वाब तो ख़्वाब ही है
आँख खुलती है और टूटकर बिखर जाता है
जाना कहां है ये तो हम भी नहीं जानते
चल पड़ते हैं दिल ले के जिधर जाता है

11
मार्च
10

काश मैं भी बाबा होता

हर किसी की इच्छा होती है कि वो जिंदगी में कुछ बने, कुछ अच्छा करे। हर छात्र कुछ ना कुछ सपने देखता ही है। कोई डाक्टर बनना चाहता है तो कोई इंजीनियर, किसी को मैनेजर बनना है तो किसी को आर्किटेक्ट, किसी को राजनीति में जाना है तो किसी को विदेश जाना है। सूची बहुत लंबी है। और अगर कोई ऎसे सपने देखने की मेहनत नहीं करता है तो उनकी तरफ से यह मेहनत भी उनके माता-पिता या रिश्तेदार कर लेते हैं। माता-पिता तो इतने मेहनती होते हैं कि बच्चे के पैदा होने के पहले ही यह सोचना प्रारंभ कर देते हैं कि उनका बच्चा क्या बनेगा। अब कुछ नालायक संतानें इस मेहनत पर जल्द ही पानी फेर देती है और कुछ थोड़े समय के बाद। कभी-कभी भगवान या किस्मत भी ये पानी फेरने का काम कर लेते हैं। पर कोई सपने देखना तो बंद नहीं कर देता है ना। क्यों करॆगा भाई हमारे माननीय मंत्रियों ने इसका इतना अभ्यास जो करवाया है, हर बार चुनाव में नये सपने दिखाते हैं और जीतने के बाद पानी फेर देते हैं उन सपनों पर। तो क्या हम मंत्रियों को चुनना बंद कर देते हैं क्या? नहीं ना।

मेरे माता-पिता ने भी कुछ सपने जरुर देखें होंगें पर मैं भी नालायकों की जमात का ही निकला। पर अच्छा है डाक्टर या इंजीनियर नहीं बना। क्योंकि मेरी तो इच्छा है कि मैं बाबा बन जाऊं। इसके लिये समय-समय पर भगवान को रिश्वत भी देता रहता हूँ। आप सोच रहें होंगें बाबा ही क्यों? जब बनने के लिये बहुत कुछ है तो बाबा क्यों? चलिये आप को बता देता हूँ कि मैं बाबा ही क्यों बनना चाहता हूँ?

बंधुवर वर्तमान समय में बाबागिरी से अच्छा कोई व्यवसाय नहीं है। इसके कई फायदे हैं। सबसे बड़ा फायदा तो यह है कि इसमें आपको कोई विनियोग नहीं करना है, मतलब यह व्यवसाय बिना पैसों के शुरू किया जा सकता है। जब आप पर पैसे लगाने वाले इतने धार्मिक लोग है हमारे देश में तो फिर उनकी भावनाओं को ठेस लगा कर आप अपने पैसे खर्च क्यों करें? दुसरा फायदा यह है कि नेतागिरी की तरह बाबागिरी में भी आपका पढ़ा-लिखा होना अनिवार्य नहीं है। हाँ अगर आप पढ़ना-लिखना जानते हैं तो उसका अतिरिक्त फायदा भी आपको मिलेगा। भाई एक तो इससे आप विदेशी शिष्यों से जुड़ सकते है और दुसरा आप टेलीविज़न की शोभा बडा सकते हैं। वैसे भी इन चैनल वालो के पास कुछ दिखाने जैसा तो है नहीं तो आप अपने आप को दिखाइये ना।

इसका तीसरा फायदा यह है कि इसमें आय बहुत ज्यादा है, इतनी कि आप सोच भी नहीं सकते। जब करोड़ो धर्मप्रेमी जनता अपनी मेहनत की कमाई आप पर न्यौछावर कर रही हो तो आप ही अनुमान लगा सकते हैं। और सबसे बड़ी बात कि आप को कोई मेहनत भी नहीं करना है, बस या तो कुछ अच्छा-अच्छा बोलना है या फिर थोड़ा योग या ध्यान सीखाना है। घबराने की जरुरत नहीं है दोनों ही चीजों के लिये बाजार में बहुत सी पुस्तकें उपलब्ध है। अब एक पुस्तक पढ़्ने जितनी मेहनत तो की ही जा सकती है ना? आप को पता भी नहीं चलेगा कि कब आपके पास बड़े-बड़े आश्रम आ जायेगें, आपके आवागमन के लिये नये-नये वाहन उपलब्ध हो जायेंगें, अथाह पैसा आपके नाम से बैंकों मे जमा हो जायेगा। यहाँ तक की आपको कहीं आने-जाने के लिये भी ढेर सारा पैसा मिलेगा।

चौथा फायदा है भगवान। जी हां भगवान। आप उचित-अनुचित जो भी करें उसकी जिम्मेदारी लेने में भगवान को कोई हर्ज नहीं होगा। आपके आश्रम में भगदड़ में कुछ लोग मर भी जाये तो आप कह सकते है भगवान की यही मर्जी थी। और यकीन मानिये भगवान कुछ नहीं कहेगा, वो चुपचाप सब स्वीकार कर लेगा। और आप अपराधबोध से बच जायेंगें। अब बताइये इतना बड़ा फायदा कहीं और मिलेगा क्या?

पाँचवा फायदा है सम्मान। एक बाबा लोग ही हैं जिनके आगे आम जनता के अलावा बड़े-बड़े नेता, अधिकारी, अभिनेता, पुलिस वाले, बिजनेस मेन सब अपना शीश नवाते हैं। कोई भी हो सब बाबाओं से डरते हैं, और डरे भी क्यों नहीं इनके समर्थकों की संख्या ही इतनी होती है। जब ये अपने बाबा के आश्रम के लिये सरकारी जमीनों पर कब्जा कर सकते हैं, लोगो को डरा-धमका कर उनकी ज़मीने छीन सकते हैं, तो आप ही सोचिये क्या नहीं कर सकते हैं?

इसके अलावा और भी कई फायदे हैं जो की आपने कुछ समय पहले समाचार पत्रों में पढ़े होंगें या इंटरनेट पर वीडियो में देखें होंगें। कुछ लोगो ने तो पुरी लीला देखने के लिये वीडियो सीडी भी प्राप्त कर ली होगी। अब किसी को कृष्ण लीला मे रूचि हो या नहीं हो पर बाबा लीला में तो है।

तो आप ही बताईये कि अगर मैं बाबा बनना चाहता हूँ तो इसमें गलत क्या है? भाई मुझे तो इतने फायदे और किसी व्यवसाय या नौकरी में नज़र नहीं आते। अगर आपको आते हों तो मुझे जरूर बताना। तब तक मैं भगवान को मनाता हूँ कि वो मुझे बाबा बना दे और किसी अच्छे से बाबा को खोजकर उनसे कुछ गुर सीख लेता हूँ।

10
मार्च
10

जनता, सरकार और टैक्स

सरकार को जनता से हमेशा यह शिकायत रही है कि जनता पूरी ईमानदारी से टैक्स नहीं चुकाती है और यह सही भी है। कई व्यापारी, बिजनेसमेन, खिलाड़ी, अभिनेता अपनी आय छुपाते हैं। तो कई व्यापारी बिना बिल के माल बेचते है। इस तरह से की जाने वाली टैक्स चोरी आम बात है। वहीं आम व्यक्ति भी यही सोचता रहता है कि टैक्स कैसे बचाया जाये। सरकार और जनता दोनों जानते हैं कि हमारे द्वारा दिये गये टैक्स से कई विकास कार्य किये जा सकते हैं, ये अलग बात है कि होते नहीं है। अगर टैक्स ना भरना जनता का गुनाह है तो कुछ ख़ता तो सरकार की भी होगी। क्योंकि ताली तो दोनों हाथो से ही बजती है ना। ये तो वही बात हो गई कि -

खूब निभेगी हम दोनों में, मेरे जैसा तू भी है
थोड़ा झूठा मैं भी ठहरा, थोड़ा झूठा तू भी है

हम अपना टैक्स ईमानदारी से देने के लिये तैय्यार हैं, अगर सरकार कुछ वादे करे कि वो -

१. हमारे टैक्स की राशि को निकम्में नेताओं, मंत्रियों की सुरक्षा पर खर्च नहीं करेगी और ना ही इनके ऎशो-आराम पर। नेताओं के साथ-साथ अभिनेताओं और खिलाड़ियों को दी जाने वाली सुरक्षा भी वापस ली जायेगी। अगर इन्हें अपनी जान की चिंता है तो अपनी सुरक्षा स्वयं करें। आखिर हमारे देश में सभी समान है तो अगर हमें सुरक्षा नहीं मिलती तो इन्हें क्यों मिले?

२. सभी मंत्रियों के अपने ही देश मे होने वाले हवाई दौरो को रद्द कर दें। क्योंकि इन लोगो का कहीं भी जाना महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण तो दूर की बात है कोई मायने ही नहीं रखता है। क्योंकि जब संसद में ही ये लड़ने-झगड़ने और विरोध करने के सिवा कुछ नहीं कर सकते तो कहीं और जाकर क्या कर लेगें। जाना ही है तो देश में बस और ट्रेन है ना।

३. उन खिलाड़ियों की सुविधायें भी खत्म कर दें जो खेल से ज्यादा विजापनों में काम करने में अपना ध्यान लगाते हैं। जब खेलना ही नहीं है तो देश की जनता की भावनाओं से क्यों खेल रहे हो भाई?

४. सभी अधिकारियों, नेताओं की आय से अधिक जो भी संपत्ति है वो जब्त कर ली जाये। क्योंकि इनका जितना धन विदेशों में और अपने देश में काले धन के रूप में यूँ ही रखा हुआ है, यदि वह देश को मिल जाये तो भारत की तस्वीर बदल सकती है और हमारी बेरंग जिंदगी में भी रंग आ सकते हैं।

५. अगर अपना कार्य करवाने के लिये सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत ना देना पड़े तो, वही धन टैक्स भरने के काम आ सकता है।

६. पुलिस वालों को वेतन नहीं दिया जाना चाहिये। जब वो जनता और अपराधियों से ही वेतन से ज्यादा कमा लेते हैं तो फिर वेतन की क्या आवश्यकता है? अगर ये सरकार के वेतन पर काम करते तो देश में इतने अपराध बढ़ सकते थे क्या?

७. सरकार अपनें सांसदों, मंत्रियों और विधायकों आदि को लैपटाप ना वितरित करें। ये पढ़े-लिखे लोगो के लिये है भाई। सरकार में ज्यादातर लोग आपराधिक छवि वाले हैं या फिर कम पढ़े-लिखे। अब ये लोग लैपटाप का क्या करेंगें?

८. इन लोगो को लालबत्ती वाली गाड़ियां दी जाती है। इन्हें सिर्फ़ लालबत्ती दी जानी चाहिये, गाड़ियां नहीं। क्योंकि पेट्रोल-ड़ीजल बहुत महंगा है। हम अपनी गाड़ियों में नहीं भरवा पाते और ये हमारे ही पैसों से मज़े से घुमते हैं। इनकों तो साईकिल दी जानीं चाहिये ताकि इनका स्वास्थ्य भी ठीक रहे और इनकें विदेशों में इलाज का खर्च भी हमें नहीं उठाना पड़े।

९. बजट सिर्फ़ आम लोगो के लिये नहीं मंत्रियों के लिये भी बनाया जाना चाहिये। इन्हें भी तो आटे-दाल, आलू-प्याज के दाम मालुम होना चाहिये।

१०. सांसद, विधायक, नेता या मंत्री बनने के लिये भी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता होना चाहिये। जैसी की नौकरी के लिये हमसे अपेक्षा की जाती है।

ऎसे और भी कई मुद्दे हैं, अगर सरकार पूरी ईमानदारी से इन पर कार्य करती है तो हम भी पूरी ईमानदारी से अपना टैक्स भरने और जिम्मेदार नागरिक बनने का वादा करतें हैं। और यह ध्यान रहे कि ये एक आम आदमी का वादा है किसी नेता का नहीं। जैसा कि ये चुनाव के समय करते हैं।

09
मार्च
10

नेशनल पार्क की सैर

पिछले रविवार मैंने और मेरे एक मित्र ने मुंबई के संजय गांधी नेशनल पार्क जाने का कार्यक्रम बनाया। चूँकि हम दोनों बाहर से हैं, और छोटे शहरों से हैं, इसलिये बड़ी उम्मीद थी कि काफ़ी तरह के पशु-पक्षी देखने को मिलेंगे। इनकों चिड़ियाघरों की तरह पिंजरों मे कैद देखने की बजाय खुले में देखना ज्यादा सुकुन देता है। खैर अपनी योजनानुसार हम नेशनल पार्क पहुँच गये। वातावरण में गर्मीं भी थी और धूप भी तेज थी। पर शायद घुमने की इच्छा उससे भी ज्यादा थी।

प्रवेश टिकट खरीद कर अंदर गये और क़रीब १ किलोमीटर चल कर वहाँ पहुँचे जहाँ लायन-टायगर सफारी का टिकट मिल रहा था। बस ने हमें ३० मिनट तक पार्क मे घुमाया पर सिर्फ २ टायगर और १ लायन ही हमें देखने के लिये मिला। हमने सोचा चलो कोई बात नहीं दुसरे पशु-पक्षी तो मिलेंगें। तो हम पार्क में काफी देर तक यहाँ से वहाँ घुमते रहें। हमारे साथ और भी कई लोग थे जो हमारी ही तरह कुछ उम्मीद लेकर आये थे। पर कुछ हिरनों को देखने के बाद पता चला की अब और कुछ भी नहीं है, जो भी था हम देख चुके हैं। ऎसा लगा पेड़ से गिरे पत्तों की तरह हम लोगो की उम्मीदें भी सड़क पर धूप में तिलमिला रही है। पर हिम्मत ना हारते हुए अपने एक स्थानीय मित्र को फोन किया, पर उसने भी इस बात की पुष्टि कर दी की वहाँ और ज्यादा कुछ नहीं है। हम लोग तो निराश हो गये पर ज्यादातर वहाँ प्रेमी युगल थे जिन्हें इससे कोई मतलब नहीं था। वो लोग या तो किसी कोने में अपनी चोंच लड़ाने में मस्त थे या फिर कोना ढ़ूढ़्ने में व्यस्त थे।

खैर पार्क से निराश होकर सोचा चलो कान्हेरी गुफ़ा ही देख लें। कान्हेरी गुफा नेशनल पार्क से ७ किमी दूर है तथा वहाँ जाने के लिये बस पार्क के अंदर ही उपलब्ध है। वहाँ जाकर थोड़ी संतुष्टि मिली। प्राचीन काल की लगभग १०० बौद्ध गुफाओं को देखकर अच्छा लगा। कुछ गुफाओं में बुद्ध की प्रतिमाऎं थी तो कुछ ऎसी लग रही थी मानों किसी ने अपने रहने के लिये कमरे बनायें होंगे। कहा जाता है कि ये गुफाऎं बौद्ध भिक्षुओं द्वारा निर्मित हैं। इन गुफाओं के आसपास आपको काफी बंदर भी मिल जायेंगें जो कि आपके हाथों से खाने-पीने की सामग्री छीनने में भी नहीं हिचकते। तो यह थी हमारी नेशनल पार्क की यात्रा।

09
मार्च
10

चिलमन

चिलमन से छुप के देखते हो, पर्दा हटा क्यों नहीं देते
बादलों में छुपा रखा है जो, चांद दिखा क्यों नहीं देते

संगदिल कह्ते हो हमें, चलो ये भी मान लेते है
प्यार कहते है जिसे, तुम ही सिखा क्यों नहीं देते

चिलमन गेसुओं की भी, रोक लेती है निगाहों को
बिखरे हुये है जो रूख़सार पे, इन्हें हटा क्यों नहीं देते

बेवफ़ा का इल्ज़ाम भी दिया, और उस पर भी ये सितम
हमसे कहते हो, अपनी वफ़ा का सिला क्यों नहीं देते

कब तक रख पाओगे, खुद को दुर हमसे देखेंगे
आखि़र दिल को, इस दिल से मिला क्यों नहीं देते

नहीं जायेंगें कभी मैख़ाने, ये वादा कर तो लिया है
आप अपने रिंद को, निगाहों से पिला क्यों नहीं देते

08
मार्च
10

रविवार की छुट्टी

रविवार। सप्ताह का वह दिन जिसका सबको इंतजार रहता है। ऎसा कौन होगा जो इस दिन को पसन्द नहीं करता होगा। हर व्यक्ति सोमवार से ही रविवार के लिये योजना बनाना प्रारंभ कर देता है कि वह इस दिन क्या करेगा। यह बात अलग है कि वह इस दिन करता कुछ नहीं है। सारी योजनाऎं बदल जाती है। पूरे सप्ताह कार्य करने के बाद एक यही दिन मिलता है जब हम अपने या अपने परिवार के लिये कुछ कर सकते हैं। अगर हमारी इच्छा सिर्फ़ आराम करने की ना हो तो। क्योंकि आराम से बड़ा और क्या काम हो सकता है, किसी ने कहा है कि-

“किसको-किसको देखिये, किसको-किसको रोईये।
आराम बड़ी चीज़ है, मुँह ढ़ांक के सोईये॥”

आप तो जानते ही होगें कि अंग्रेजों ने छुट्टी के लिये रविवार का ही दिन क्यों चुना। दरअसल इस दिन को उन्होनें चर्च जाने के लिये चुना था। इसलिये वो लोग इस दिन छुट्टी मनाते थे। ठीक वैसे ही जैसे खाड़ी देशो में शुक्रवार के दिन नमाज़ के कारण छुट्टी रखी जाती है। अब हम भारतीयों के ३३ करोड़ देवी-देवता है इसलिये हम उनके लिये कोई एक दिन तो तय नहीं कर सकते। तो हमारी सरकार ने अंग्रेजो की नकल करना ही ठीक समझा और हमें भी रविवार की छुट्टी मिल गयी। गलती सरकार की नहीं हमारे भगवानों की है, उन्होनें इतने अवतार नहीं लेना चाहिये। अब हमारी सरकार भी क्या करें।

कहतें हैं ना कि नक़ल के लिये भी अक़ल की जरूरत होती है, वो शायद हमारी सरकार ने लगा ली। तभी तो दो दिनों के सप्ताहांत की जगह हमें सिर्फ़ एक दिन का ही साप्ताहिक अवकाश मिला। काश हमारी सरकार मे इतनी अक़ल ना होती या फिर थोड़ी ज्यादा होती तो और भी कई मसलें थे जिन पर विचार किया जा सकता था। खैर अब किया भी क्या जा सकता है सिवाय इसके हम अपने-अपने कार्यालय में, कार्य के समय, बैठकर रविवार की योजना बनाऎं। आप भी बनाईयें और मैं भी बनाता हूँ।

08
मार्च
10

SMS Collection 3

Zindagi ek Gift hai (Kabool kijiye)
Zindagi ek Ehsaas hai (Mehsoos kijiye)
Zindagi ek Dard hai (Bant lijiye)
Zindagi ek Pyass hai (Pyar dijiye)
Zindagi ek Milan hai (Muskra lijiye)
Zindagi ek Judai hai (Sabr kijiye)
Zindagi ek Aansu hai (Pee lijiye)
Zindagi akhir zindagi hai
Ise har haal mein jee lijiye
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Kitne din ho gaye

Kitne Hafte gujar gaye

Baat mahino tak bhi chali gayee

Ab saal bhi ho jayega

Ab to kehna mano

Chalo

Zid na karo aaj to

Naha Lo….
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Khafa ho ya koi gham hai
Number kho gaya ya balance kam hai,
Bhejo SMS agar Dam hai
Ya phir maan gaye ke SMS ke BADSHAH hum hai.
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A true and caring relation doesn’t have to speak loud,
A soft SMS is just enough to express the heartiest feelings…
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Rishte aur Raste 1 sikke ke 2 pehlu hote hai..
Kabhi Rishte nibhate-nibhate Raste badal jate hai..
Kabhi Raste pe chalte-chalte Rishte ban jate hai.
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There is no limit of God’s love;
No measure of his grace;
His power knows no boundaries and
His blessings are endless.
May God be with you always.
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Neil Armstrong lands on Moon & sees 2 men..
Asks them : Who are you?
They Replied :
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.
.
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Cameraman Santosh ke saath Deepak Chourasiya..
Aaj Tak! Sabse Tez.
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Gold rate keeps increasing day by day..
I’m worried about you..
You should be very careful,
Someone may kidnap you,
Because You are 24 carat golden heart person.
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